अरूण उवाच

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Tuesday, March 23, 2004

प्रतिभाशाली

होता मैं इतना प्रतिभाशाली
तो बन जाता मैं भी कवि
लिखता सुदंर कविता
देखता जो न देखे रवि ||

होता मै इतना प्रतिभाशाली
तो बन जाता मै चित्रकार
खेलता रंगो से रंगोली
दिखाता निसर्ग के आकार ||

होता मै इतना प्रतिभाशाली
बजाता मै फिर बाँसुरी वीणा
छेडता सुरों के सरगम
गाता सुरों का कहना ||

होता मै इतना प्रतिभाशाली
तो बन जाता मैं अभिनेता
अप्सराओं को बाहों मे लेके
कहता मै तुमसे प्यार करता ||

किंतु ना मै कवि, ना चित्रकार
न छेडूँ सुर, न करू प्यार
कम्पयूटर की दुनिया में
रह गया मै बस पैसों का यार ||