अरूण उवाच

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Sunday, September 19, 2004

संतुष्ट

जो मेरे लिए योग्य
वह सब कुछ तूने मुझे दे दिया
जो कर सकता था मै धारण
वही मैने पा लिया ॥
फिर भी करता रहा तकरार उसके बारेमे
जो मुझे मिल न सका
लेकिन यही सच है कि दीया था तुने मुझे सब कुछ
मगर मै काफी कुछ पा न सका ॥
१९ सितंबर २००४

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