आशा
कल सुबह सूरज फिर निकलेगा
सुनहरी किरणों से फिर छायेगा
नयी चेतना ले आयेगा
नये रहस्य खोल जायेगा ॥
नये संदेशों से भरकर
फिर नयी हवाएं लहरायेगी
वृक्षों के पर्णों से बहकर
नया संगीत गुनगुनायेगी ॥
पंछियों के नये कुजन से
बसंत ॠतु सा मौसम होगा
नये फूलों के सुगंध से भरा
आल्हादित सा वातावरण होगा ॥
नये उमंगों से भरकर, नयी आशाओं को लेकर
घने मेघ फिर लौट आयेंगे
एक नयी स्फूर्तिली वर्षा से
नये जीवन को जीवन देंगे ॥
आज के सूर्यास्त पर
जीवन का यह क्रम नही रुकेगा
कल सुबह सूरज फिर निकलेगा
सुनहरी किरणों से फिर छायेगा ॥
२३ अगस्त २००५
